योगिनी एकादशी 2026

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योगिनी एकादशी 2026

🕉️ योगिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, मुहूर्त और महत्व

🙏 सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और जब बात आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की हो, तो ‘योगिनी एकादशी’ का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है।

🌺 योगिनी एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त 🌺

वर्ष 2026 में योगिनी एकादशी का व्रत 30 जून, मंगलवार को रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ 29 जून की रात्रि से ही हो जाएगा, परंतु उदयातिथि के अनुसार व्रत 30 जून को ही मान्य होगा।

योगिनी एकादशी 2026

🪔 योगिनी एकादशी 2026 का महत्व और पौराणिक संदर्भ 🪔

योगिनी एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जो अनजाने में हुए पापों से मुक्ति चाहते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताई थी।

संस्कृत श्लोक:

*एकादशी व्रतं नाम सर्वपापप्रणाशनम्। पुण्यप्रदं च सौख्यदं च मुक्तिदं च विशेषतः॥*

हिंदी अनुवाद: एकादशी का व्रत सभी पापों का नाश करने वाला, पुण्य प्रदान करने वाला, सुख देने वाला और विशेष रूप से मुक्ति प्रदान करने वाला है।

योगिनी एकादशी 2026

🌟 योगिनी एकादशी व्रत की पौराणिक कथा 🌟

प्राचीन काल में अलकापुरी नगरी में राजा कुबेर के यहाँ हेम नामक एक माली रहता था। वह प्रतिदिन मानसरोवर से फूल लाकर कुबेर की पूजा के लिए देता था। एक दिन अपनी पत्नी के प्रेमपाश में बंधकर वह फूल लाना भूल गया। क्रोधित होकर कुबेर ने उसे श्राप दे दिया जिससे वह कोढ़ी हो गया।

🌸 मुक्ति का मार्ग:

भटकते हुए हेम माली मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुँचा। ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। श्रद्धापूर्वक व्रत करने से हेम माली का कोढ़ समाप्त हो गया और उसे पुनः दिव्य शरीर प्राप्त हुआ।

🪔 योगिनी एकादशी 2026 पूजा विधि 🪔

इस पावन दिन पर भगवान नारायण की पूजा का विधान है। श्रद्धालु निम्नलिखित विधि अपना सकते हैं:

1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करें।

2. व्रत संकल्प: हाथ में जल लेकर योगिनी एकादशी का व्रत रखने का संकल्प लें।

3. विष्णु पूजन: भगवान विष्णु की प्रतिमा को पीले वस्त्र, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें। भगवान विष्णु की आरती और चालीसा का पाठ करें।

4. दीपदान: संध्या के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं।

📌 महत्वपूर्ण निर्देश: एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है। व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए।

🌟 योगिनी एकादशी के लाभ 🌟

🌸 समस्त शारीरिक रोगों और विशेषकर चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है।

🌸 जाने-अनजाने में हुए पापों का प्रायश्चित होता है।

🌸 जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का वास होता है।

🌸 मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति में सहायक है।

📌 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: योगिनी एकादशी का व्रत 2026 में कब है?

उत्तर: वर्ष 2026 में यह व्रत 30 जून, मंगलवार को रखा जाएगा।

प्रश्न: क्या इस दिन तुलसी तोड़ सकते हैं?

उत्तर: नहीं, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजन के लिए एक दिन पूर्व ही पत्ते तोड़कर रख लें।

प्रश्न: एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए?

उत्तर: व्रत में फलाहार लिया जा सकता है। कुट्टू का आटा, साबूदाना, फल और दूध का सेवन उत्तम है। एकादशी व्रत के दौरान अन्न का पूर्ण त्याग करना चाहिए।

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