देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

🕉️ देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

🙏 हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का स्थान सर्वोपरि माना गया है, जो आत्मा की शुद्धि और परमात्मा से मिलन का मार्ग प्रशस्त करता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है, जो संपूर्ण वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और व्रत की सही तिथि को लेकर भक्तों के मन में अत्यंत जिज्ञासा है, क्योंकि इसी दिन से भगवान श्री हरि विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस पावन लेख में हम देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पौराणिक व्रत कथा और चातुर्मास के नियमों पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे, ताकि आपकी साधना सफल हो सके। 🙏

🪔 🌺 देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और तिथि का महत्व 🌺

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी को ‘हरिशयनी एकादशी’, ‘पद्मा एकादशी’ और ‘आषाढ़ी एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से ही चौमासा अर्थात चातुर्मास का आरंभ होता है, जिसमें सभी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और यज्ञोपवीत आदि वर्जित हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव के हाथों में आ जाता है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे होगा। शास्त्रों के अनुसार, उदया तिथि का पालन करना सर्वोत्तम माना जाता है। इसलिए देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त के अनुसार 25 जुलाई को व्रत रखना सर्वश्रेष्ठ फलदायी होगा।

🌸 देवशयनी एकादशी 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां व समय:

🌟 एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026, सुबह 09:12 बजे से

🌟 एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026, सुबह 11:34 बजे तक

🌟 उदया तिथि के अनुसार व्रत: 25 जुलाई 2026 (शनिवार)

🌟 व्रत पारण का समय: 26 जुलाई 2026, सुबह 05:39 बजे से सुबह 08:22 बजे तक

🌸 देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त का निर्धारण और पंचांग गणना

हिन्दू पंचांग की सूक्ष्म गणना के अनुसार, इस वर्ष देवशयनी एकादशी पर कई दुर्लभ और शुभ योगों का महासंयोग बन रहा है। इस दिन अमृतसिद्धि योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग का सुंदर समन्वय हो रहा है, जो साधकों के लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होगा। पंचांग के अनुसार, इस पवित्र काल में भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त सुबह 7:21 बजे से लेकर सुबह 9:03 बजे तक विशेष रूप से फलदायी है।

इस शुभ बेला में की गई भगवान नारायण की आराधना सीधे वैकुंठ धाम तक पहुँचती है। प्राचीन ग्रंथों और Vedas on Britannica के अनुसार, इस समय सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे प्रकृति की ऊर्जा में भी गहरा परिवर्तन आता है। इस काल में की जाने वाली मानसिक साधना मनुष्य को आंतरिक शांति प्रदान करती है।

Divine Insight - देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

🪔 🌺 पूजा विधि, व्रत कथा और चातुर्मास का अध्यात्म 🌺

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को योगनिद्रा में सुलाने की एक विशिष्ट शास्त्रीय विधि होती है। इस दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजा के समय देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है। भगवान विष्णु की प्रतिमा को पीले वस्त्र, पीले फूल, पंचामृत, धूप, दीप और विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित किया जाता है।

इसके पश्चात, भगवान विष्णु को शयन कराने के लिए इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है:

*”सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्।*

*विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्वं चराचरम्॥”*

इस श्लोक का अर्थ है कि हे जगन्नाथ! आपके शयन करने पर यह संपूर्ण संसार सो जाता है और आपके जाग जाने पर यह संपूर्ण चराचर जगत जागृत हो जाता है। भगवान विष्णु को शयन कराने के बाद चार महीने तक आत्म-निरीक्षण और जप-तप का विधान है, जिसका वर्णन Hinduism on Britannica में भी मिलता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में मान्धाता नाम के एक परम प्रतापी और धर्मपरायण राजा थे। उनके राज्य में तीन वर्षों तक घोर अकाल पड़ा, जिससे पूरी प्रजा त्राहि-त्राहि कर उठी। राजा अपनी प्रजा के दुखों को दूर करने के लिए व्याकुल होकर अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुंचे। ऋषि ने राजा को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत पूर्ण विधि-विधान से करने का निर्देश दिया। राजा ने वैसा ही किया, जिसके प्रभाव से राज्य में मूसलाधार वर्षा हुई और प्रजा को भुखमरी से मुक्ति मिली। तभी से इस व्रत की महिमा संपूर्ण जगत में व्याप्त हो गई।

🪔 🌺 देवशयनी एकादशी पर किए जाने वाले विशेष उपाय 🌺

देवशयनी एकादशी का दिन आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की समस्त बाधाओं को दूर करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। यदि आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं, तो देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त के शुभ समय में भगवान नारायण का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक अवश्य करें।

🌟 विशेष कल्याणकारी उपाय:

🌸 पीली वस्तुओं का दान: इस दिन किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी और केले का दान करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है।

🌸 तुलसी पूजन और परिक्रमा: संध्याकाल में तुलसी के पौधे के समीप गाय के घी का दीपक जलाएं और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए 11 परिक्रमा करें। ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए।

🌸 विष्णु सहस्रनाम का पाठ: इस पावन तिथि पर विष्णु सहस्रनाम या Bhagavad Gita on Wikipedia के अध्यायों का पाठ करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

इस प्रकार की साधनाएं मनुष्य के अंतःकरण को शुद्ध करती हैं और उसे वैदिक दर्शन के उच्च स्तर पर ले जाती हैं।

📌 🌺 देवशयनी एकादशी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQ) 🌺

देवशयनी एकादशी 2026

📌 प्रश्न: देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त क्या है और व्रत किस दिन रखा जाएगा?

उत्तर: वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत उदया तिथि के अनुसार 25 जुलाई (शनिवार) को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 07:21 बजे से सुबह 09:03 बजे तक रहेगा।

📌 प्रश्न: देवशयनी एकादशी को हरिशयनी क्यों कहा जाता है?

उत्तर: ‘हरि’ भगवान विष्णु का नाम है और ‘शयनी’ का अर्थ है शयन करना। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में चले जाते हैं, इसलिए इसे हरिशयनी एकादशी कहा जाता है।

📌 प्रश्न: चातुर्मास के दौरान कौन-कौन से कार्य वर्जित होते हैं?

उत्तर: चातुर्मास के दौरान विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत, नए गृह का निर्माण या प्रवेश जैसे सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य पूर्णतः वर्जित होते हैं। इस समय केवल ईश्वर की भक्ति और साधना की जाती है।

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