यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

"Whenever there is a decline in righteousness, O Bharata, and a rise of unrighteousness, then I manifest Myself. For the protection of the good, for the destruction of the wicked, and for the establishment of righteousness, I am born age after age."

— Bhagavad Gita, Chapter 4: Verse 7–8

गीता के मूल सिद्धांत

⚖️
Nishkama Karma — निष्काम कर्म
फल की इच्छा के बिना कर्म करो। कर्तव्य करो, परिणाम ईश्वर पर छोड़ो।
🌟
Atman — आत्मा का ज्ञान
आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है। शरीर नश्वर है, आत्मा शाश्वत।
💙
Bhakti — भक्ति का मार्ग
अनन्य भक्ति से परमेश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। प्रेम ही परमात्मा है।
🧘
Moksha — मोक्ष का लक्ष्य
जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति — यही जीवन का परम पुरुषार्थ है।

गीता के 18 अध्याय

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