गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026

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गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026

नमस्ते साधक प्रेमियों, ‘भक्ति अमृत सनातन’ के दिव्य मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है। आज हम आषाढ़ मास की उस पावन तिथि की चर्चा करेंगे जो समस्त विघ्नों के विनाशक भगवान श्री गणेश को समर्पित है।

🕉️ गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत पूजा विधि और चंद्रोदय समय

🙏 सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत आत्मिक शुद्धि और संकट निवारण का एक अमोघ साधन है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ‘गजानन संकष्टी चतुर्थी’ के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष, गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत पूजा विधि और चंद्रोदय समय का ज्ञान प्रत्येक साधक के लिए अनिवार्य है, ताकि वे पूर्ण श्रद्धा और शास्त्रीय विधान के साथ परमात्मा की आराधना कर सकें। यह व्रत न केवल कष्टों को हरता है, बल्कि साधना के मार्ग में आने वाली मानसिक बाधाओं का भी उच्छेदन करता है।

🌺 गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त 🌺

गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निराहार या फलाहार व्रत रखते हैं।

🌟 चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 3 जुलाई 2026, रात्रि 09:45 बजे से।

🌟 चतुर्थी तिथि समाप्त: 4 जुलाई 2026, रात्रि 08:30 बजे तक।

🌟 चंद्रोदय समय (प्रमुख): 4 जुलाई 2026 को चंद्रोदय का समय रात्रि 09:12 बजे (स्थान भेद के अनुसार परिवर्तन संभव) रहेगा।

शास्त्रों में वर्णित है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाए। गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत पूजा विधि और चंद्रोदय समय को ध्यान में रखते हुए, साधकों को सायंकाल में गणेश जी की विशेष आरती और पूजन की तैयारी पूर्व में ही कर लेनी चाहिए।

🪔 गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व 🪔

गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। भगवान गणेश ‘विद्या वारिधि’ हैं, जो हमें गुरु परम्परा से प्राप्त ज्ञान को आत्मसात करने की शक्ति प्रदान करते हैं।

🌸 पूजा की संक्षिप्त विधि:

1. पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

2. भगवान को लाल चंदन, दूर्वा, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

3. ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।

4. गणेश जी को उनके प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।

5. संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण या वाचन करें।

संस्कृत श्लोक एवं भावार्थ:

*वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥*

भावार्थ: हे घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे समस्त कार्यों को सदा विघ्न रहित पूर्ण करें।

🌸 गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत पूजा विधि और चंद्रोदय समय का पालन क्यों करें? 🌸

यह व्रत केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि चित्त की शुद्धि की एक प्रक्रिया है। जब साधक पूर्ण निष्ठा के साथ चंद्रोदय की प्रतीक्षा करता है, तो वह धैर्य और तितिक्षा (सहनशीलता) का अभ्यास करता है। संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी के ‘गजानन’ स्वरूप की पूजा करने से बुद्धि प्रखर होती है और अहंकार का नाश होता है।

🌺 संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा और परंपरा 🌺

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वयं देवताओं ने भी अपने कार्यों की सिद्धि के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया था। जब भगवान शिव ने गणेश जी को अग्रपूज्य होने का वरदान दिया, तब से ही चतुर्थी तिथि का महत्व अत्यधिक बढ़ गया। गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत पूजा विधि और चंद्रोदय समय का अनुसरण करते हुए जो भक्त कथा का पाठ करते हैं, उनके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

📌 विशेष ध्यान दें: पूजा में तुलसी दल का प्रयोग वर्जित है। गणेश जी को केवल दूर्वा ही अर्पित करें, क्योंकि दूर्वा शीतलता प्रदान करती है और साधक के मानसिक ताप को शांत करती है।

📌 प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत पूजा विधि और चंद्रोदय समय में चंद्रमा को अर्घ्य देना क्यों आवश्यक है?

उत्तर: पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रमा को अपने सौंदर्य पर अभिमान हो गया था, जिसे गणेश जी ने भंग किया था। चतुर्थी के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है और चंद्र दोष दूर होते हैं।

प्रश्न: क्या यह व्रत निर्जला रखना अनिवार्य है?

उत्तर: यह साधक की शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। सामान्यतः लोग फलाहार (दूध और फल) के साथ यह व्रत रखते हैं, परंतु पूर्ण सात्विकता अनिवार्य है।

प्रश्न: गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 का सर्वोत्तम मंत्र क्या है?

उत्तर: ‘ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा’ का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है।

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