भगवान विष्णु पूजा विधि: श्री हरि नारायण की षोडशोपचार पूजन पद्धति एवं मंत्र

भगवान विष्णु पूजा विधि: श्री हरि नारायण की षोडशोपचार पूजन पद्धति एवं मंत्र

सनातन धर्म में भगवान श्री हरि विष्णु संपूर्ण ब्रह्मांड के पालनकर्ता और पोषणकर्ता हैं। वे दया, करुणा, मर्यादा और संतुलन के अधिष्ठाता हैं। श्रीमद्भागवत एवं विष्णु पुराण के अनुसार जो साधक श्रद्धापूर्वक श्री नारायण की आराधना करता है, उसके जीवन से दरिद्रता और अशांति का नाश होकर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

भगवान विष्णु पूजा का आध्यात्मिक महत्व

श्री हरि विष्णु का स्वरूप अत्यंत शांत और मंगलमय है। वे क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर शयन करते हुए भी निरंतर सजग हैं, जो यह संदेश देता है कि संसार के कोलाहल और विषमताओं के बीच भी साधक को अपनी आत्मा में शांत और स्थिर रहना चाहिए। उनके चार हाथों में स्थित शंख (नाद ब्रह्म), चक्र (धर्म चक्र व काल), गदा (अधर्म का दमन) और पद्म (संसार में रहकर भी निर्लिप्तता) जीवन के उच्च आदर्शों का बोध कराते हैं।

पूजा का उचित समय एवं शुभ दिन

  • वार: गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन श्री हरि नारायण की पूजा हेतु विशेष रूप से प्रशस्त है।
  • शुभ तिथियां: प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की एकादशी तथा पूर्णिमा तिथि विष्णु आराधना के लिए परम फलदायी मानी गई हैं।
  • शुभ समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त अथवा सूर्योदय के समय पूजा करना सर्वोत्तम होता है।

सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (Puja Samagri)

  • भगवान विष्णु अथवा लक्ष्मीनारायण की प्रतिमा या चित्र
  • पीला स्वच्छ वस्त्र (चौकी पर बिछाने हेतु एवं प्रभु को अर्पित करने हेतु)
  • पीले पुष्प (गेंदा, कनेर अथवा पीला कमल) और पुष्पमाला
  • तुलसी दल (विष्णु पूजा में अनिवार्य)
  • पीला चंदन अथवा गोपी चंदन
  • अक्षत (हल्दी या केसर से रंगे हुए पीले चावल)
  • पंचामृत (गाय का कच्चा दूध, दही, घी, शहद, शर्करा)
  • गंगाजल एवं तांबे/पीतल का जलपात्र
  • जनेऊ, कलावा, इत्र
  • धूप, कपूर और शुद्ध गाय के घी का दीपक
  • नैवेद्य: पीले फल (केला), बेसन के लड्डू, पंजीरी अथवा पंचमेवा

क्रमबद्ध विष्णु पूजन विधि (Step-by-Step Vidhi)

  1. आसन एवं पवित्रीकरण: पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। आचमन करें और स्वयं को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  2. दीपक प्रज्वलन: पूजा चौकी पर घी का दीपक जलाएं और दीपदेवता को नमन करें।
  3. संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर श्री हरि के निमित्त व्रत अथवा दैनिक पूजा का संकल्प लें।
  4. ध्यान एवं आवाहन: दोनों हाथ जोड़कर श्री नारायण का ध्यान करें:
    "शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
    लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥"
  5. आसन एवं पाद्य-अर्घ्य: भगवान को पीला पुष्प अर्पित कर आसन दें। आचमनी से चरण प्रक्षालन हेतु जल छोड़ें।
  6. स्नान: शुद्ध जल, तदुपरांत पंचामृत और पुनः गंगाजल से स्नान कराएं।
  7. वस्त्र व यज्ञोपवीत: पीला वस्त्र अथवा कलावा अर्पित करें तथा जनेऊ समर्पित करें।
  8. चंदन व अक्षत: अनामिका अंगुली से पीला चंदन लगाएं और केसरिया अक्षत अर्पित करें।
  9. तुलसी दल अर्पण: श्री हरि के चरणों में तुलसी दल समर्पित करें। शास्त्रों में कहा गया है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु किसी भी भोग को स्वीकार नहीं करते।
  10. धूप एवं दीप: धूपबत्ती और घी का दीप भगवान को निवेदित करें।
  11. नैवेद्य भोग: केले, बेसन के लड्डू अथवा पंजीरी का भोग लगाएं। ध्यान रहे भोग में तुलसी पत्र अवश्य रखें।
  12. तांबूल एवं दक्षिणा: पान, सुपारी, लौंग, इलायची और दक्षिणा अर्पित करें।
  13. आरती एवं क्षमा प्रार्थना: सपरिवार खड़े होकर "ॐ जय जगदीश हरे" आरती करें और पूजा समर्पण करें।

प्रामाणिक विष्णु मंत्र

द्वादशाक्षर महामंत्र:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"

विष्णु मूल मंत्र:
"ॐ विष्णवे नमः"

विष्णु गायत्री मंत्र:
"ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥"

श्री जगदीश हरे आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • विष्णु पूजन में पीले रंग की वस्तुओं और पीले फूलों को प्राथमिकता दें।
  • भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य रखें।
  • पूजा के समय मन में शांत और परोपकारी भाव रखें।

क्या न करें:

  • रविवार को तुलसी न तोड़ें: रविवार, एकादशी और सूर्यास्त के बाद तुलसी पत्र तोड़ना वर्जित है।
  • भगवान विष्णु को श्वेत (बिना रंगे) अक्षत सीधे न चढ़ाएं, हल्दी से पीला करके ही चढ़ाएं।
  • बासी अथवा अशुद्ध सामग्री का प्रयोग न करें।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र. क्या एकादशी के दिन भगवान विष्णु को चावल का भोग लगाया जा सकता है?

उत्तर: नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन और चावल का भोग वर्जित माना गया है। इस दिन फलाहार या मेवे का भोग लगाना चाहिए।

प्र. घर में सत्यनारायण कथा किस दिन करानी चाहिए?

उत्तर: पूर्णिमा, एकादशी, गुरुवार अथवा किसी भी शुभ कार्य के पूर्व सत्यनारायण पूजन अत्यंत उत्तम माना जाता है।

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