माँ लक्ष्मी पूजा विधि: दीपावली व शुक्रवार पूजन, श्रीयंत्र साधना और कुबेर अर्चन
सनातन धर्म में माँ महालक्ष्मी धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य, समृद्धि और शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। वे भगवान श्री हरि विष्णु की नित्य संगिनी हैं। शास्त्रों में स्पष्ट है कि जहाँ धर्म, स्वच्छता, सत्य और परस्पर प्रेम होता है, वहीं माँ लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। शुक्रवार एवं दीपावली पर शास्त्रसम्मत विधि से लक्ष्मी पूजन करने से दरिद्रता का निवारण होकर घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
माँ लक्ष्मी पूजा का आध्यात्मिक महत्व
लक्ष्मी जी केवल भौतिक धन की देवी नहीं हैं, बल्कि वे अष्टलक्ष्मी के रूप में ज्ञान (विद्या लक्ष्मी), धैर्य (धैर्य लक्ष्मी), संतति (संतान लक्ष्मी), विजय (विजय लक्ष्मी) और धान्य (धान्य लक्ष्मी) प्रदान करने वाली हैं। कमल के आसन पर विराजमान माँ लक्ष्मी यह सिखाती हैं कि संसार के भौतिक पंक (कीचड़) में रहते हुए भी मनुष्य को कमल की भांति निर्लिप्त और पवित्र रहना चाहिए। उनके साथ प्रथम पूज्य गणेश जी का पूजन यह बोध कराता है कि धन के साथ सद्बुद्धि का होना अनिवार्य है।
पूजा का उचित समय एवं शुभ दिन
- वार: शुक्रवार का दिन माँ महालक्ष्मी की नित्य व विशेष उपासना के लिए सर्वोत्तम है।
- प्रदोष काल: सूर्यास्त के उपरांत का समय 'प्रदोष काल' और 'स्थिर लग्न' लक्ष्मी पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
- विशेष पर्व: कार्तिक अमावस्या की दीपावली, आश्विन मास की शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) तथा धनतेरस।
सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (Puja Samagri)
- माँ लक्ष्मी एवं भगवान श्री गणेश की संयुक्त प्रतिमा अथवा चित्र
- चौकी और उस पर बिछाने हेतु लाल या पीला रेशमी वस्त्र
- कमल का पुष्प अथवा लाल गुलाब, पुष्पमाला
- कमलगट्टे की माला, 5 या 11 पीली कौड़ियां, गोमती चक्र
- श्रीयंत्र (यदि उपलब्ध हो)
- रोली, कुमकुम, अक्षत, अष्टगंध चंदन
- कच्चा गाय का दूध, गंगाजल, पंचामृत
- शुद्ध गाय के घी के दीपक तथा तिल के तेल का दीपक
- धूप, कपूर, लौंग, इलायची, पान का पत्ता, सुपारी
- नैवेद्य: खीर, मखाने, बताशे, अनार, सिंघाड़ा अथवा सफेद मिष्ठान्न
क्रमबद्ध लक्ष्मी पूजन विधि (Step-by-Step Vidhi)
- शुद्धिकरण एवं तैयारी: घर व पूजा स्थल को स्वच्छ करें। पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। गंगाजल छिड़क कर पवित्रीकरण करें।
- दीपक प्रज्वलन: पूजा चौकी पर घी का दीपक जलाएं। दीपावली पर एक बड़ा चार बत्तियों वाला चौमुखी दीपक अवश्य प्रज्वलित करें।
- गणेश पूजन: सर्वप्रथम गणेश जी का आवाहन करें, उन्हें तिलक लगाएं, दूर्वा व मोदक अर्पित करें।
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माँ लक्ष्मी का आवाहन व ध्यान: हाथ में अक्षत और कमल का फूल लेकर ध्यान करें:
"नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥" - अभिषेक व स्नान: प्रतिमा पर जल और पंचामृत का छींटा देकर स्नान कराएं।
- वस्त्र व आभूषण: लाल चुनरी अथवा मौली रूपी वस्त्र समर्पित करें।
- चंदन, कुमकुम व अक्षत: माँ के मस्तक पर कुमकुम और चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें।
- कमल पुष्प व कौड़ी अर्पण: कमल का पुष्प, पीली कौड़ियां, गोमती चक्र और कमलगट्टा माँ के चरणों में समर्पित करें।
- धूप-दीप दर्शन: सुगंधित धूपबत्ती और घी का दीप दर्शन कराएं।
- नैवेद्य भोग: चावल की खीर अथवा बताशे का भोग लगाएं। आचमन हेतु जल छोड़ें।
- श्री सूक्त / कनकधारा पाठ: संभव हो तो ऋग्वैदिक श्री सूक्त अथवा कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
- आरती एवं क्षमा प्रार्थना: सपरिवार खड़े होकर आरती करें और घर में स्थायी वास की प्रार्थना करें।
प्रामाणिक महालक्ष्मी मंत्र
महालक्ष्मी बीज मंत्र:
"ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः"
लक्ष्मी गायत्री मंत्र:
"ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥"
सरल दैनिक मंत्र:
"ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्bodyभ्यो नमः"
श्री लक्ष्मी जी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गावे। उर आनन्द समावे, पाप उतर जावे॥
क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
- माँ लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और कुबेर जी का पूजन अवश्य करें।
- पूजा में कमल के फूल अथवा सुगंधित गुलाब के पुष्पों का प्रयोग करें।
- घर के मुख्य द्वार को सदैव स्वच्छ और प्रकाशमय रखें।
क्या न करें:
- संध्याकाल में घर में झाड़ू न लगाएं और न ही किसी को उधार दें।
- माँ लक्ष्मी को तुलसी पत्र न चढ़ाएं (तुलसी भगवान विष्णु की पटरानी स्वरूप मानी जाती हैं)।
- अहंकार, जुआ अथवा अनैतिक साधनों से अर्जित धन का प्रदर्शन न करें।
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र. क्या बिना श्रीयंत्र के लक्ष्मी पूजा की जा सकती है?
उत्तर: हां, माँ लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष पूर्ण श्रद्धा से की गई पूजा भी उतनी ही फलदायी होती है।
प्र. शुक्रवार के दिन लक्ष्मी जी को किस वस्तु का भोग लगाना सर्वोत्तम है?
उत्तर: माँ लक्ष्मी को गाय के दूध से बनी चावल की खीर अथवा मखाने की खीर का भोग लगाना अत्यंत प्रिय माना गया है।