माँ लक्ष्मी मंत्र: धन, वैभव और समृद्धि प्रदाता महालक्ष्मी अष्टकम एवं साधना
सनातन धर्म में माँ महालक्ष्मी (Goddess Lakshmi) धन, वैभव, ऐश्वर्य, सौभाग्य और पोषण की अधिष्ठात्री देवी हैं। वे भगवान विष्णु की शक्ति हैं। जहाँ धर्म, स्वच्छता और प्रेम होता है, वहीं माँ लक्ष्मी का स्थाई वास होता है।
॥ महालक्ष्मी महामंत्र ॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ॥
माँ लक्ष्मी के 4 अचूक सिद्ध मंत्र
1. एकाक्षरी बीज मंत्र (Single Beej Mantra)
ॐ श्रीं नमः॥
'श्रीं' माँ लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप है। कमलगट्टे की माला से इसका प्रतिदिन 108 बार जप करने से दरिद्रता का नाश होता है।
2. कुबेर-लक्ष्मी धन आकर्षण मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
यह मंत्र धन के कोषाध्यक्ष कुबेर और अष्टलक्ष्मी की संयुक्त कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली है।
3. कनकधारा स्तोत्र का मूल मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः जगत्प्रसूत्यै नमः॥
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र से सोने की वर्षा का ऐतिहासिक प्रसंग जुड़ा है।
लक्ष्मी कृपा प्राप्ति के अचूक नियम
- घर की उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा को सदैव स्वच्छ, जलपूर्ण और सुगंधित रखें।
- शुक्रवार के दिन संध्या समय घर के मुख्य द्वार पर गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- महिलाओं का आदर करें, क्योंकि नारी साक्षात गृहलक्ष्मी का स्वरूप होती है।
- कमलगट्टे की माला, श्रीयंत्र और दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना कर पूजा करें।