दीपावली महापर्व: पंचमहोत्सव, लक्ष्मी-गणेश पूजन शुभ मुहूर्त, इतिहास और आध्यात्मिक रहस्य
कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपावली (Diwali / Deepawali) सनातन धर्म का सबसे भव्य, प्रकाशमान और आनंददायक महापर्व है। यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और अधर्म पर धर्म की शाश्वत विजय का प्रतीक है।
दीपावली से जुड़े 5 प्रमुख ऐतिहासिक एवं पौराणिक प्रसंग
- भगवान श्रीराम का अयोध्या आगमन: 14 वर्ष के वनवास और लंकापति रावण का वध करने के पश्चात भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के अयोध्या लौटने पर अवधवासियों ने घी के दीपक जलाकर दीपोत्सव मनाया था।
- समुद्र मंथन से माँ लक्ष्मी का प्राकट्य: कार्तिक अमावस्या के दिन ही क्षीरसागर मंथन से धन की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था और भगवान विष्णु से उनका वरण हुआ।
- भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर वध: भगवान श्रीकृष्ण ने सत्यभामा सहित 16,100 कन्याओं को नरकासुर के बंधन से मुक्त कर असुर का संहार किया (नरक चतुर्दशी)।
- महाराजा बलि पर वामन विजय: भगवान वामन ने तीन पग में संपूर्ण त्रिलोकी नापकर दानवीर बलि का उद्धार किया।
- जैन धर्म में भगवान महावीर का निर्वाण: इसी पावन तिथि पर तीर्थंकर महावीर स्वामी को कैवल्य ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
दीपावली पंचमहोत्सव का 5 दिवसीय क्रम
- 1. धनतेरस (Dhanteras): भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के जनक) और कुबेर देव का पूजन। यम दीपदान।
- 2. नरक चतुर्दशी (रूप चौदस): उबटन स्नान और यमराज के निमित्त 14 दीपकों का प्रज्वलन।
- 3. महालक्ष्मी पूजन (दीपावली): स्थिर लग्न (वृषभ/सिंह लग्न) में गणेश-लक्ष्मी, कुबेर और सरस्वती का षोडशोपचार पूजन।
- 4. गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट: भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण करने की स्मृति में 56 भोग और गो-पूजन।
- 5. भाई दूज (यम द्वितीया): यमराज और यमुना जी के पावन भ्रातृ-स्नेह का पर्व, बहनों द्वारा भाइयों की दीर्घायु का आशीर्वाद।