विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानें। भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए व्रत कथा, चंद्रोदय समय और विशेष मंत्रों का संपूर्ण विवरण यहाँ पढ़ें।
🙏 सनातन धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता गजानन की आराधना अनिवार्य है। वर्ष 2026 में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विकट संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाएगा। विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि को विस्तार से समझना उन सभी भक्तों के लिए आवश्यक है जो अपने जीवन से संकटों का नाश और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

यह विशेष दिन भगवान गणेश के 'विकट' स्वरूप को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने से साधक के बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं। आज के इस लेख में हम आपको इस पावन तिथि के महत्व, पूजा की संपूर्ण प्रक्रिया और चंद्रोदय के सटीक समय के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे। 🙏
शास्त्रों के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है 'संकटों को हरने वाली चतुर्थी'। वैशाख माह की इस चतुर्थी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है क्योंकि यह ग्रीष्म ऋतु के आगमन और नई ऊर्जा के संचार का प्रतीक है।
विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि का पालन करने से कुंडली के बुध दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं, इसलिए विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।
संस्कृत श्लोक:

*गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जंबू फल चारू भक्षणम्।*
*उमासुतं शोक विनाशकारकं, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥*
हिंदी अनुवाद:
हाथी के समान मुख वाले, भूतगणों द्वारा सेवित, कैथ और जामुन के फलों का भक्षण करने वाले, माता पार्वती के पुत्र और दुखों का विनाश करने वाले विघ्नेश्वर के चरण कमलों में मैं नमस्कार करता हूँ। 🌸
[Image 1: भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित करते हुए भक्त]
इस पावन व्रत की सफलता के लिए शास्त्रोक्त विधि का पालन करना अनिवार्य है। नीचे दी गई प्रक्रिया के अनुसार आप अपनी पूजा संपन्न कर सकते हैं:
🌟 प्रातः काल की तैयारी:
व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह रंग भगवान गणेश को प्रिय है।
🌟 संकल्प और स्थापना:
पूजा घर की सफाई करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
🌟 पूजन सामग्री:
पूजा में गंगाजल, अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप, गंध, और पुष्प अर्पित करें। भगवान गणेश को 21 'दुर्वा' की गांठें अवश्य चढ़ाएं। दुर्वा चढ़ाते समय "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें।
🌟 नैवेद्य (भोग):
गणपति बाप्पा को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इसके साथ ही ऋतु फल भी अर्पित करें।
🌟 मंत्र साधना:
पूजा के दौरान गणेश चालीसा और श्री गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना विशेष लाभकारी होता है।
विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के अंतर्गत चंद्रोदय का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना पूर्ण नहीं माना जाता। चंद्रमा को दूध और जल का अर्घ्य देते समय अपने मन की मनोकामना भगवान के समक्ष रखें। 🌼
[Image 2: चंद्रमा को अर्घ्य देते हुए भक्त और गणेश पूजन की थाली]
प्राचीन काल में एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के तट पर बैठे थे। वहां माता पार्वती ने समय व्यतीत करने के लिए चौपड़ खेलने की इच्छा व्यक्त की। समस्या यह थी कि हार-जीत का फैसला कौन करेगा? तब शिवजी ने घास के कुछ तिनके इकट्ठे कर एक पुतला बनाया और उसमें प्राण प्रतिष्ठा कर उसे निर्णायक नियुक्त किया।
खेल में माता पार्वती बार-बार जीत रही थीं, लेकिन जब निर्णायक से पूछा गया, तो उसने महादेव को विजयी घोषित कर दिया। इससे माता पार्वती क्रोधित हो गईं और उन्होंने उस बालक को लंगड़ा होने और कीचड़ में रहने का श्राप दे दिया। बालक ने क्षमा मांगी, तब माता ने कहा कि "यहाँ नागकन्याएं गणेश चतुर्थी के दिन व्रत करने आएंगी, उनके उपदेश से तुम इस श्राप से मुक्त हो जाओगे।"
बालक ने विधिपूर्वक व्रत कथा का श्रवण किया और गणेश जी की आराधना की, जिससे वह श्रापमुक्त होकर भगवान शिव के पास कैलाश पहुँच गया। तभी से यह माना जाता है कि जो भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा से यह व्रत करता है, उसकी सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
🌙 चंद्रोदय समय और तिथि गणना 🌙
वर्ष 2026 में विकट संकष्टी चतुर्थी की तिथि 5 अप्रैल, 2026 को पड़ रही है।
📌 चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 4 अप्रैल 2026, रात्रि से।
📌 चतुर्थी तिथि समाप्त: 5 अप्रैल 2026, देर रात तक।
📌 चंद्रोदय का समय: 5 अप्रैल की रात्रि लगभग 09:15 बजे (स्थान के अनुसार समय में थोड़ा परिवर्तन संभव है)।
भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय चंद्रोदय समय की पुष्टि अवश्य कर लें ताकि अर्घ्य देने में कोई त्रुटि न हो। 🌟
[Image 3: भगवान गणेश का 'विकट' स्वरूप और मोदक का भोग]
📌 प्रोफेशनल FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न: विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या खाना चाहिए?
उत्तर: इस दिन फलाहार करना चाहिए। आप साबूदाना, कुट्टू का आटा, फल और दूध का सेवन कर सकते हैं। नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करें।
प्रश्न: क्या यह व्रत बिना चंद्रमा को देखे तोड़ा जा सकता है?
उत्तर: नहीं, संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद ही पूर्ण माना जाता है। यदि बादल के कारण चंद्रमा न दिखे, तो आकाश की ओर मुख करके मानसिक अर्घ्य दिया जा सकता है।
प्रश्न: भगवान गणेश को कितनी दुर्वा चढ़ानी चाहिए?
उत्तर: भगवान गणेश को हमेशा जोड़ों में दुर्वा चढ़ानी चाहिए। 21 दुर्वा की गांठें चढ़ाना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
प्रश्न: विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि का मुख्य लाभ क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य लाभ मानसिक शांति, ऋण से मुक्ति और कार्यों में आने वाली बाधाओं का निवारण है।