मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026: चैत्र नवरात्रि छठा दिन
मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026 के साथ जानें शुभ मुहूर्त, भोग, कथा और आरती। चैत्र नवरात्रि के छठे दिन देवी की कृपा पाने का संपूर्ण मार्ग यहाँ है।
🙏 नमस्ते भक्तजनों! 'भक्ति अमृत सनातन' के इस पावन मंच पर आपका स्वागत है। चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अपने चर्मोत्कर्ष की ओर बढ़ रहा है। कल, मंगलवार, 24 मार्च 2026 को नवरात्रि का छठा दिन है, जो आदि शक्ति के अत्यंत पराक्रमी और करुणामयी स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित है।

आज के इस विशेष लेख में हम मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026 के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। देवी कात्यायनी न केवल शत्रुओं का नाश करने वाली योद्धा देवी हैं, बल्कि वे वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करने और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए भी पूजी जाती हैं। यदि आप भी इस नवरात्रि अपनी मनोकामनाएं सिद्ध करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 🙏
🌺 मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026: शुभ मुहूर्त और महत्व 🌺
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। वर्ष 2026 में षष्ठी तिथि का उदय सोमवार की शाम से हो रहा है, लेकिन उदयातिथि के अनुसार मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026 का पालन 24 मार्च को किया जाएगा।
महत्वपूर्ण समय (शुभ मुहूर्त):
🌟 ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:46 से 05:34 तक।

🌟 अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 से 12:52 तक।
🌟 अमृत काल: शाम 04:06 से 05:35 तक।
मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें वे तलवार, कमल का पुष्प, अभय मुद्रा और वरद मुद्रा धारण किए हुए हैं। इनका वाहन सिंह है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, देवी कात्यायनी बृहस्पति (गुरु) ग्रह को नियंत्रित करती हैं। अतः इनकी पूजा से जातक की कुंडली में गुरु दोष समाप्त होता है और शक्ति का संचार होता है।
*(Image 1 : मां कात्यायनी का भव्य स्वरूप और षष्ठी तिथि का विवरण)*
🪔 मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026: पूजन सामग्री और विधि 🪔
षष्ठी तिथि के दिन देवी की आराधना के लिए शुद्धता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026 के अंतर्गत निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
आवश्यक पूजन सामग्री:
🌸 लाल या पीले रंग के वस्त्र (देवी को प्रिय)।
🌸 शहद (मां कात्यायनी का सबसे प्रिय भोग)।
🌸 लाल पुष्प (विशेषकर गुलाब या लाल चंपा)।
🌸 श्रृंगार की सामग्री (चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर आदि)।
🌸 गंगाजल, धूप, दीप और नैवेद्य।
पूजा की सरल विधि:
1. शुद्धिकरण: प्रातः काल स्नान के बाद लाल या पीले वस्त्र धारण करें। मंदिर की सफाई कर गंगाजल छिड़कें।
2. संकल्प: हाथ में जल और पुष्प लेकर अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु संकल्प लें।
3. आवाहन: मां कात्यायनी का ध्यान करते हुए उन्हें आसन ग्रहण करने की प्रार्थना करें।
4. पंचोपचार पूजा: देवी को गंध, पुष्प, धूप, दीप और शहद का भोग अर्पित करें। ध्यान रहे कि मां कात्यायनी को शहद चढ़ाने से भक्त के व्यक्तित्व में आकर्षण और वाणी में मधुरता आती है।
5. आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में कर्पूर से आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।
इस पावन चैत्र नवरात्रि में देवी की यह आराधना आपके जीवन के समस्त कष्टों को हर लेगी।
*(Image 2 : शहद का भोग लगाते हुए और मां कात्यायनी की पूजा करते हुए भक्त)*
🌸 मां कात्यायनी के सिद्ध मंत्र और स्तोत्र 🌸
मंत्रों का जाप करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026 के लिए नीचे दिए गए मंत्रों का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है:
ध्यान मंत्र:
*वन्दे वाञ्छितमनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।*
*सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥*
हिंदी अनुवाद: मैं उन यशस्वी देवी कात्यायनी की वंदना करता हूँ, जो सिंह पर सवार हैं, चार भुजाओं वाली हैं और जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है।
सिद्ध मंत्र:
*ॐ देवी कात्यायन्त्यै नमः॥*
विवाह बाधा निवारण मंत्र (कात्यायनी मंत्र):
यदि कन्या के विवाह में विलंब हो रहा हो, तो इस मंत्र का जाप अत्यंत चमत्कारी है:
*कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।*
*नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥*
हिंदी अनुवाद: हे कात्यायनी! हे महामाये! हे महायोगिनी! हे स्वामिनी! आप नंदगोप के पुत्र (श्री कृष्ण) को मेरा पति बनाइये, मैं आपको नमस्कार करती हूँ।
🌺 मां कात्यायनी की पौराणिक कथा 🌺
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि साक्षात देवी उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर जन्म लिया, जिसके कारण उनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा।
जब महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से देवी कात्यायनी का प्राकट्य हुआ। ऋषि कात्यायन ने सबसे पहले उनकी पूजा की। देवी कात्यायनी ने ही अत्याचारी महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके भय से मुक्त कराया था। इसीलिए इन्हें 'योद्धा देवी' भी कहा जाता है। इनकी भक्ति करने वाले भक्त कभी पराजित नहीं होते।
*(Image 3 : मां कात्यायनी और महिषासुर मर्दिनी का युद्ध दृश्य)*
📌 मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: मां कात्यायनी को कौन सा रंग प्रिय है?
उत्तर: मां कात्यायनी को लाल और पीला रंग अत्यंत प्रिय है। षष्ठी के दिन भक्तों को लाल रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए।
प्रश्न: मां कात्यायनी को शहद का भोग क्यों लगाया जाता है?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, शहद शुद्धता और मिठास का प्रतीक है। मां कात्यायनी को शहद अर्पित करने से भक्त के जीवन में खुशहाली आती है और शारीरिक सौंदर्य में वृद्धि होती है।
प्रश्न: क्या यह पूजा केवल अविवाहित कन्याएं ही कर सकती हैं?
उत्तर: नहीं, मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र 2026 का पालन कोई भी भक्त कर सकता है। हालांकि, शीघ्र विवाह के लिए कन्याओं के बीच यह पूजा विशेष रूप से लोकप्रिय है।
प्रश्न: चैत्र नवरात्रि 2026 में षष्ठी तिथि कब समाप्त होगी?
उत्तर: पंचांग के अनुसार, षष्ठी तिथि 24 मार्च 2026 को शाम 04:07 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।