मई 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची: शुभ मुहूर्त
मई 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची यहाँ देखें। अपरा एकादशी, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।
🙏 भक्ति अमृत सनातन के सभी पाठकों को सादर प्रणाम। ज्येष्ठ मास की पावन बेला चल रही है, जो आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत ऊर्जावान मानी जाती है। आज 7 मई 2026, गुरुवार का दिन है और आने वाले 7 से 15 दिनों में हिंदू धर्म के कई महत्वपूर्ण पर्व आने वाले हैं। यदि आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं, तो मई 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची को समझना और तदनुसार पूजन करना आपके लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होगा।

सनातन धर्म में तिथियों का चयन केवल पंचांग गणना नहीं, बल्कि ग्रहों की स्थिति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संतुलन है। आने वाले दिनों में अपरा एकादशी, शनि जयंती और वट सावित्री जैसे महापर्व आने वाले हैं, जो भक्तों के कष्टों का निवारण करने वाले माने जाते हैं। 🙏
🌺 मई 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची: तिथियां और महत्व 🌺
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की तिथियां विशेष रूप से दान, पुण्य और पितृ तर्पण के लिए फलदायी होती हैं। नीचे दी गई मई 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची आपको अपने आध्यात्मिक कार्यों की योजना बनाने में सहायता करेगी:
🌟 12 मई 2026 (मंगलवार): अपरा एकादशी व्रत
🌟 14 मई 2026 (गुरुवार): प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)

🌟 15 मई 2026 (शुक्रवार): शनि जयंती, वट सावित्री व्रत (अमावस्या पक्ष)
🌟 16 मई 2026 (शनिवार): ज्येष्ठ अमावस्या, स्नान-दान अमावस्या
इन पर्वों का पालन करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि सनातन धर्म के अनुसार व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी सुलभ होता है।
🪔 अपरा एकादशी: अपार पुण्य फल की प्राप्ति 🪔
मई 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची में सबसे पहला और महत्वपूर्ण नाम 'अपरा एकादशी' का आता है। ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी को ही अपरा एकादशी कहा जाता है। 'अपरा' का अर्थ है अपार, अर्थात वह व्रत जिसे करने से अपार धन और पुण्य की प्राप्ति हो।
श्लोक:
*एकादशी व्रत समं किंचित् पवित्रं पापनाशनम्।*
*न भूतं न भविष्यति स्वर्गमोक्षप्रदायकम्॥*
अर्थ: एकादशी व्रत के समान पापों को नष्ट करने वाला दूसरा कोई पवित्र व्रत न भूतकाल में हुआ है और न भविष्य में होगा। यह व्रत स्वर्ग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाला है।
📌 शुभ मुहूर्त: एकादशी तिथि का प्रारंभ 11 मई की रात्रि से होगा और समापन 12 मई 2026 को होगा। व्रत का पारण 13 मई को सूर्योदय के पश्चात करना शास्त्र सम्मत है।
🌸 महत्व: इस दिन भगवान त्रिविक्रम (विष्णु जी) की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्महत्या, परनिंदा और असत्य बोलने जैसे घोर पापों से भी मुक्ति मिल जाती है।
🪔 शनि जयंती और वट सावित्री व्रत: विशेष संयोग 🪔
15 मई 2026 का दिन आध्यात्मिक रूप से अत्यंत भारी और महत्वपूर्ण है। मई 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची में यह दिन दो बड़े आयोजनों का साक्षी बनेगा।
#### 1. शनि जयंती 2026
सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या को हुआ था। शनि देव न्याय के देवता हैं और कर्मफल प्रदाता हैं।
श्लोक:
*नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।*
*छायामार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥*
अर्थ: नीले अंजन के समान आभा वाले, सूर्य के पुत्र, यमराज के बड़े भाई और छाया व सूर्य से उत्पन्न शनि देव को मैं प्रणाम करता हूँ।
📌 साधना सूत्र: शनि दोष या साढ़ेसाती से मुक्ति के लिए इस दिन पूजा विधि के अनुसार तिल के तेल का दीपक जलाना और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का जाप करना श्रेष्ठ है।
#### 2. वट सावित्री व्रत 2026
सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प से यमराज को पराजित कर अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे।
🌸 अनुष्ठान: इस दिन बरगद (वट) के वृक्ष की पूजा की जाती है। वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चा सूत लपेटती हैं और अपने परिवार की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।
🌺 ज्येष्ठ अमावस्या और पितृ तर्पण का विधान 🌺
16 मई 2026 को ज्येष्ठ अमावस्या है। मई 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची में अमावस्या का स्थान दान और तर्पण के लिए सर्वोच्च है। ज्येष्ठ मास की गर्मी में प्यासे जीवों को जल पिलाना और छायादार वृक्ष लगाना अनंत गुना फल प्रदान करता है।
📌 विशेष निर्देश: इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के पश्चात पितरों के निमित्त तर्पण अवश्य करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। शुभ मुहूर्त में किया गया दान दरिद्रता का नाश करता है।
📌 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: मई 2026 में अपरा एकादशी कब है?
उत्तर: मई 2026 में अपरा एकादशी का व्रत 12 मई, मंगलवार को रखा जाएगा।
प्रश्न: शनि जयंती 2026 का क्या महत्व है?
उत्तर: शनि जयंती शनि देव के जन्मोत्सव का दिन है। इस दिन दान-पुण्य करने से शनि की क्रूर दृष्टि शांत होती है और रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं।
प्रश्न: वट सावित्री व्रत में किस वृक्ष की पूजा की जाती है?
उत्तर: वट सावित्री व्रत में बरगद (वट) के वृक्ष की पूजा की जाती है, क्योंकि यह दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक है।
प्रश्न: क्या ज्येष्ठ अमावस्या पर दान करना अनिवार्य है?
उत्तर: अनिवार्य तो नहीं, परंतु शास्त्रानुसार ज्येष्ठ अमावस्या पर जल, अन्न और तिल का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।