फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026: पूजन सामग्री और आरती विधान
फाल्गुन विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि और महत्व के बारे में जानें। 21 फरवरी 2026 को भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए शुभ मुहूर्त, मंत्र और पूजन विधि यहाँ विस्तार से पढ़ें।
🙏 सनातन धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य देव माना गया है। किसी भी शुभ कार्य का प्रारंभ उनकी आराधना के बिना अधूरा है। कल यानी शनिवार, 21 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे 'विनायक चतुर्थी' या 'ढुंढिराज चतुर्थी' के नाम से जाना जाता है।

🙏 आज के इस विशेष लेख में हम फाल्गुन विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि और महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यदि आप अपने जीवन से विघ्नों को दूर करना चाहते हैं और सुख-समृद्धि की कामना रखते हैं, तो यह व्रत आपके लिए अत्यंत फलदायी सिद्ध हो सकता है।
🌺 फाल्गुन विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि और महत्व का आध्यात्मिक आधार 🌺
विनायक चतुर्थी का व्रत हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है, लेकिन फाल्गुन मास की चतुर्थी का अपना एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन भगवान गणेश के 'ढुंढिराज' स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ फाल्गुन विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि और महत्व का पालन करते हैं, उनके जीवन के सभी मानसिक और शारीरिक कष्ट समाप्त हो जाते हैं।
शास्त्रों के अनुसार:
*गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जंबू फलचारु भक्षणम्।*
*उमासुतं शोक विनाशकारकं, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्॥*

हिंदी अनुवाद: हाथी के समान मुख वाले, भूतगणों द्वारा सेवित, कैथ और जामुन के फलों को चाव से खाने वाले, माता पार्वती के पुत्र और दुखों का विनाश करने वाले उन विघ्नेश्वर भगवान गणेश के चरण कमलों में मैं प्रणाम करता हूँ।
🪔 शुभ मुहूर्त और तिथि: फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026 🪔
वर्ष 2026 में विनायक चतुर्थी की तिथि और समय का ज्ञान होना अति आवश्यक है ताकि आप सही समय पर पूजन संपन्न कर सकें।
🌟 चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 20 फरवरी 2026, दोपहर 02:38 बजे से।
🌟 चतुर्थी तिथि समाप्त: 21 फरवरी 2026, दोपहर 01:01 बजे तक।
🌟 मध्याह्न पूजा मुहूर्त: 21 फरवरी 2026, सुबह 11:27 से दोपहर 01:00 बजे तक।
📌 विशेष नोट: विनायक चतुर्थी की पूजा हमेशा मध्याह्न (दोपहर) के समय की जाती है। इसलिए व्रत का मुख्य संकल्प और पूजन शनिवार, 21 फरवरी को ही करना शास्त्र सम्मत होगा।
🌸 फाल्गुन विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि और महत्व: चरण-दर-चरण प्रक्रिया 🌸
भगवान गणेश की पूजा में सरलता और भाव का विशेष महत्व है। यहाँ फाल्गुन विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि और महत्व को विस्तार से समझाया गया है:
1. ब्रह्म मुहूर्त में जागरण: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और स्वच्छ पीले या लाल वस्त्र धारण करें।
2. संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें कि "हे गणपति देव, मैं आज आपके विनायक चतुर्थी व्रत का पालन करूँगा/करूँगी, मेरी पूजा स्वीकार करें।"
3. पूजा स्थल की तैयारी: एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
4. अभिषेक: यदि प्रतिमा धातु की है, तो गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें।
5. षोडशोपचार पूजन: भगवान को सिंदूर, अक्षत, पुष्प, और विशेष रूप से 'दूर्वा' (21 गांठें) अर्पित करें।
6. भोग: गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर ऋतु फल भी अर्पित किए जा सकते हैं।
7. मंत्र जप: पूजा के दौरान "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।