सोमवार व्रत एवं सोलह सोमवार: विधि, कथा, शिव कृपा और मनोकामना सिद्धि
सोमवार का व्रत (Somvar Vrat) भगवान चंद्रमौली शिव को समर्पित है। 'सोम' का अर्थ चंद्रमा भी है और उमा (पार्वती) सहित शिव भी (स+उमा = सोम)। शिव पुराण के अनुसार, सोमवार का नियमित व्रत रखने अथवा सावन के सोमवार व 16 सोमवार का संकल्प लेने से मनवांछित फल और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
16 सोमवार व्रत का संकल्प और नियम
कुंवारी कन्याएं उत्तम वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित स्त्रियां अखंड सौभाग्य एवं दांपत्य सुख के लिए 16 सोमवार का व्रत रखती हैं। यह व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से अथवा श्रावण मास के प्रथम सोमवार से प्रारंभ किया जाता है:
- प्रातः स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करें और शिवलिंग पर कच्चा दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करें।
- गेहूं के आटे को घी में भूनकर और गुड़ मिलाकर 'चूरमा' तैयार करें।
- इस प्रसाद के तीन बराबर भाग करें: एक भाग शिवजी को अर्पण, दूसरा भाग मंदिर में उपस्थित भक्तों को वितरण, और तीसरा भाग स्वयं संध्या समय फलाहार रूप में ग्रहण करें।
सोमवार व्रत के आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ
- कुंडली में कमजोर चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है, जिससे मानसिक अवसाद और चंचलता दूर होती है।
- विवाह में आ रही समस्त अड़चनें दूर होकर योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
- महामृत्युंजय और पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' की सिद्धि सुगम होती है।