श्री गणेश मंत्र: विघ्नहर्ता के अचूक मंत्र, संकटनाशन स्तोत्र एवं साधना विधि
सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा, अनुष्ठान अथवा नवीन उद्यम के आरंभ में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश (Lord Ganesha) का स्मरण और पूजन अनिवार्य है। गणेश जी बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि और समस्त विघ्नों के हर्ता हैं।
॥ महागणपति मूल मंत्र ॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ: हे घुमावदार सूंड वाले, विशाल देह वाले और करोड़ों सूर्यों के समान दिव्य तेज वाले देवाधिदेव! आप मेरे समस्त कार्यों को सदैव बाधा रहित और निर्विघ्न रूप से पूर्ण करें।
भगवान गणेश के 5 अत्यंत प्रभावशाली मंत्र
1. गणेश बीज मंत्र (Beej Mantra)
ॐ गं गणपतये नमः॥
यह गणेश जी का मूल बीज मंत्र है। प्रतिदिन 108 बार इसका जप करने से मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और कार्यक्षेत्र में आ रही समस्त अड़चनें दूर होती हैं।
2. ऋद्धि-सिद्धि प्रदाता मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
यह मंत्र व्यापार, धन वृद्धि और सामाजिक प्रतिष्ठा की वृद्धि के लिए अचूक माना गया है।
3. विघ्ननाशक मंत्र
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
यह गणेश गायत्री मंत्र है, जो बुद्धि को प्रखर करता है और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।
गणेश जी की पूजन विधि और प्रिय वस्तुएं
- दूर्वा (दूब घास): गणेश जी को 21 गांठ दूर्वा अर्पित करने से वे तुरंत प्रसन्न होते हैं।
- मोदक एवं लड्डू: बेसन अथवा बूंदी के मोदक का भोग लगाना चाहिए।
- लाल सिंदूर एवं लाल पुष्प: गणेश जी को लाल सिंदूर का तिलक लगाएं और लाल गुड़हल का पुष्प अर्पित करें।
- बुधवार का दिन: बुधवार गणेश जी का विशेष दिन है। इस दिन गणेश मंत्र का जप विशेष फलदायी होता है।