माँ दुर्गा मंत्र: सर्वकल्याणकारी नवार्ण मंत्र, दुर्गा सप्तशती श्लोक एवं साधना
सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति दुर्गा (Maa Durga) परम शक्ति, संहारिणी और जगत की पालनहार देवी हैं। दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण) के अनुसार, संकट, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा के नाश के लिए माँ दुर्गा के मंत्र साक्षात कल्पवृक्ष के समान हैं।
॥ सर्वकल्याणकारी दुर्गा मंत्र ॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे नारायणी! आप सब मंगलों में मंगल रूप हैं, कल्याणदायिनी हैं, सभी पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को सिद्ध करने वाली हैं। हे त्रिनेत्री गौरी! हे शरणागतवत्सला! आपको हमारा कोटि-कोटि प्रणाम है।
परम शक्तिशाली नवार्ण मंत्र (Navarna Mantra)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
नवार्ण मंत्र माँ भगवती के नौ अक्षरों का अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली मंत्र है:
- ऐं: माँ सरस्वती का बीज मंत्र (ज्ञान, विद्या और बुद्धि प्रदाता)।
- ह्रीं: माँ महालक्ष्मी का बीज मंत्र (ऐश्वर्य, धन और शांति प्रदाता)।
- क्लीं: माँ महाकाली का बीज मंत्र (शत्रुनाश, संहार और अभय प्रदाता)।
- चामुण्डायै विच्चे: चंड-मुंड नाशिनी देवी को हमारा नमन, हमें अज्ञान के बंधनों से मुक्त करें।
दुर्गा सप्तशती के सिद्ध संपुट श्लोक
1. समस्त विपत्तियों के निवारण हेतु:
"शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"
2. भय एवं रोग मुक्ति हेतु:
"रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥"
साधना के आवश्यक नियम
- माँ दुर्गा की पूजा में लाल रंग का विशेष महत्व है। लाल आसन, लाल पुष्प (गुड़हल) और लाल चंदन अर्पित करें।
- नवरात्रि, शुक्रवार अथवा अष्टमी-नवमी तिथि को नवार्ण मंत्र का जप अत्यधिक फलदायी होता है।
- शुद्ध घी का अखंड दीपक प्रज्वलित कर रुद्राक्ष अथवा कमलगट्टे की माला से जप करें।